विज्ञापन

देखना फिर कैसे इनकी तरह तुम्हारे सितारे चमकते है।

Hitendra Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये बिन पैसे के मजदूर है,
        
                                                    
                            
फिर भी नहीं ये मजबूर है।
ये अपना काम हर रोजाना करते है,
बिना श्रांत करते ही रहते है।
नहीं इन्हें कोई टोकता व नहीं कोई रोकता है,
क्योंकि इस तरह से ये अपने कार्यों में घुले है।
कभी अपनी मजदूरी बिना मजबूरी के करना,
देखना फिर कैसे इनकी तरह तुम्हारे सितारे चमकते है।
6 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13199 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10960 कविताएं

View Profile

Ramjeet pal

2388 कविताएं

View Profile