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पोवारी को सौंदर्य व वैभव भरपूर बढ़े

Historian 0.C.

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                            साहित्य सृजन पुनः होये
        
                                                    
                            
पोवारी साहित्य को सृजन भरपूर होये।
उमंग लक होये, उत्साह लक होये
पोवारी साहित्य को सृजन भरपूर होये।।

उन्नत साहित्य बनें
पोवारी साहित्य आता भरपूर उन्नत होये।
उमंग लक होये, उत्साह लक होये
पोवारी साहित्य आता भरपूर उन्नत होये।।

भाषा को सौंदर्य पुनः बढ़े
पोवारी भाषा को सौंदर्य भरपूर बढ़े।
उमंग लक बढ़ें,उत्साह लक बढ़े
पोवारी भाषा को सौंदर्य भरपूर बढ़े।।

भाषा को वैभव पुनः बढ़े
पोवारी भाषा को वैभव भरपूर बढ़े।
उमंग लक बढ़ें,उत्साह लक बढ़े
पोवारी भाषा को वैभव भरपूर बढ़े।।

पोवारी भाषा की प्रतिष्ठा बढ़ें
पोवारी भाषा की प्रतिष्ठा भरपूर बढ़े।
उमंग लक बढ़ें, उत्साह लक बढ़ें
पोवारी भाषा की प्रतिष्ठा भरपूर बढ़े।।

प्रेरक विचारों को दौर से
समाज की बौद्धिक चेतना समृद्ध बनें।
उमंग लक बढ़ें, उत्साह लक बढ़ें
पोवारी भाषा को सौंदर्य व वैभव बढ़ें।।

नवी ऊंचाई पर चढ़े
मातृभाषा पोवारी नवों इतिहास गढ़े।
उमंग लक बढ़ें, उत्साह लक बढ़ें
पोवारी भाषा को सौंदर्य व वैभव बढ़ें।।

-ओ सी पटले
एक महीने पहले
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