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तुम्हारी उपस्थिति

Hemsingh Rawat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारा होना
        
                                                    
                            
किसी कविता में लिखे हुए शब्द जैसा नहीं,
बल्कि उस मौन जैसा है
जिसे पढ़ने के लिए
किसी भाषा की आवश्यकता नहीं होती।

तुम्हारी बातें
देर तक मेरे भीतर ठहरी रहती हैं,
जैसे शाम के बाद
खिड़की पर ठहरी हुई धूप—
जिसे छुआ नहीं जा सकता,
फिर भी जिसकी गर्माहट
बहुत देर तक महसूस होती है।

तुम्हारी स्मृतियाँ
मेरे पास रखी कोई पुरानी चीज़ नहीं,
वे तो मेरे दिनों के बीच
चुपचाप चलती हुई
एक परिचित रोशनी हैं।

मैंने प्रेम को
तुमसे माँगना नहीं सीखा,
बस तुम्हें चाहना सीखा है—
बिना किसी शर्त के,
बिना किसी वादे के,
जैसे नदी
समुद्र तक पहुँचने के लिए
किसी से अनुमति नहीं माँगती।

तुम रहो—
तो शब्दों को अर्थ मिलता है,
और तुम दूर रहो
तो तुम्हारी याद
मेरे भीतर एक पूरा संसार बना देती है।
हेम
2 महीने पहले
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