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तुम्हे चाहना

Hemsingh Rawat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हें चाहना
        
                                                    
                            
किसी उजली दोपहर की तरह सरल नहीं,
यह तो उस साँझ का उतरना है
जो धीरे-धीरे
मन के सबसे एकांत कोनों में
अपना घर बना लेती है।

तुम्हारी कही हुई बातें
अब केवल बातें नहीं रहीं,
वे मेरे भीतर
किसी पुराने गीत की तरह बस गई हैं—
जिन्हें सुनने के लिए
तुम्हारा पास होना भी आवश्यक नहीं।

कभी-कभी तुम्हारी स्मृति
अचानक मेरे सामने आ बैठती है,
और मैं देर तक
कुछ कहे बिना उसे देखता रहता हूँ;
जैसे कोई यात्री
अपने रास्ते में मिले
उस पेड़ को देखता है
जिसकी छाँव में उसने
कभी थककर साँस ली थी।

तुम्हारे साथ बिताए हुए क्षण
समय के बीत जाने से पुराने नहीं हुए,
बल्कि और गहरे उतर गए हैं—
जैसे बारिश के बाद
मिट्टी में उतरती हुई
किसी अनकही खुशबू की तरह।

मैंने तुमसे प्रेम
तुम्हें अपना कहने के लिए नहीं किया,
बल्कि इसलिए किया
कि तुम्हारा होना
मेरे भीतर की उदासी को
एक अर्थ देता है।

तुम मेरे जीवन की
कोई अधूरी पंक्ति नहीं हो,
जिसे पूरा करना बाकी हो—
तुम तो वह भाव हो
जिसके बाद
शब्द कम पड़ जाते हैं।

और अगर कभी
ज़िंदगी हमें अलग दिशाओं में ले जाए,
तो भी मेरे भीतर
तुम्हारे लिए बचा रहेगा
एक शांत-सा कोना—
जहाँ न कोई शिकायत होगी,
न कोई प्रश्न…

बस तुम्हारी स्मृति होगी,
तुम्हारी आवाज़ की हल्की-सी गूँज होगी,
और एक मन होगा
जो बहुत कुछ कहकर भी
अंततः इतना ही कह पाएगा—

तुम्हें चाहना
मेरी ज़िंदगी की
सबसे सुंदर अनुभूतियों में से एक था।
 
2 महीने पहले
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