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जहाँ प्रेम समाप्त हुआ

Hemsingh Rawat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहाँ प्रेम समाप्त हुआ
        
                                                    
                            

प्रेम कभी एक दिन में नहीं मरता।
वह पहले अपनी आवाज़ खोता है,
फिर प्रतीक्षा,
फिर विश्वास...
और अंत में
एक मुस्कान ओढ़कर
किसी भीड़ में खो जाता है।

मैंने तुम्हें खोया नहीं था,
मैंने तो बस देखा था—
कैसे एक पूरा आकाश
धीरे-धीरे
अपना नीला रंग भूल सकता है।

तुम्हारे जाने के बाद
मेरे कमरे की दीवारें
पहले से अधिक सफ़ेद हो गईं।
शायद उन्हें भी पता था
कि दुख का कोई रंग नहीं होता।

मैंने समय से कहा—
"मुझे उससे मुक्त कर दो।"
समय मुस्कुराया और बोला—
"जिसे तुम प्रेम कहते हो,
वह मेरी सीमा के बाहर जन्म लेता है।"

अब मेरी हथेलियों में
तुम्हारा हाथ नहीं,
केवल कुछ अधूरी रेखाएँ हैं,
जो हर सुबह
मुझसे यही पूछती हैं—
"क्या हर अधूरी कहानी
किसी की पूरी ज़िंदगी बन जाती है?"

कभी-कभी मैं रात के सबसे शांत पहर में
अपने भीतर उतरता हूँ।
वहाँ एक उजड़ा हुआ नगर है—
जहाँ उम्मीद की खिड़कियाँ बंद हैं,
स्मृतियों के दीप बुझ चुके हैं,
और एक अकेला यात्री
अब भी तुम्हारा नाम
हवा की पीठ पर लिख रहा है।

तुम्हें शायद कभी पता भी न चले
कि तुम्हारे जाने के बाद
मैंने रोना कम नहीं किया—
बस आँसुओं को
शब्दों में बदलना सीख लिया।

अब मैं किसी से शिकायत नहीं करता।
क्योंकि प्रेम ने मुझे सिखाया है—
सबसे गहरी चीख़
हमेशा ख़ामोशी में सुनाई देती है।

और यदि कभी
किसी शाम तुम्हारे हृदय में
अचानक एक अनाम उदासी उतर आए,
तो समझ लेना—
कहीं कोई मन
आज भी तुम्हें दोष नहीं देता,
सिर्फ़ उतनी ही सच्चाई से चाहता है,
जितनी सच्चाई से
डूबता हुआ सूरज
हर शाम क्षितिज को
अपना अंतिम रंग सौंप देता है।

शायद प्रेम का अंतिम रूप
मिलन नहीं होता—
बल्कि यह स्वीकार करना होता है
कि कुछ लोग
हमारी ज़िंदगी में रहने के लिए नहीं,
हमें हमेशा के लिए बदल देने के लिए आते हैं।
—हेम
2 महीने पहले
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