विज्ञापन

सावन आया, बादल छाया!

हरिदयाल तिवारी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन आया, बादल छाया,
        
                                                    
                            
धूप ने सबका चैन उड़ाया।

हरा-हरा वन उपवन भाए,
तोता राजा मिर्चा खाए।

बादल बरसा, मेंढक आए,
टर्र-टर्र, टर्र-टर्र राग बजाए।

झींगुर उसमें ताल मिलाए,
दादुर, मोर, पपीहा गाए।

सुबह-सुबह सब खेत में जाएं,
मड़ुआ, मकई, धान लगाए।

कागज़ की जो नाव चलाए,
बच्चों के यह मन से भाए।

पेड़-पौधे खूब नहाए,
पत्ते मोती जैसे पाए।

डाली पर झूले पड़ जाएँ,
बच्चे झूलें, गीत सुनाएँ।

बिजली चमके चम-चम-चम,
बादल गरजे घम-घम-घम।

रिमझिम-रिमझिम बूँदें आएँ,
सूखी धरती हँसती जाए।

छत पर बूँदें टप-टप गिरतीं,
माटी में ये खुशबू भरतीं।

चिड़िया पंख पसार कर आए,
धूप में अपने पंख सुखाए।

मोर पंख फैलाकर नाचे,
देख उसे सब बच्चे नाचें।

सावन के दिन बड़े सुहाने,
लगते जैसे मीठे गाने।

सावन आया, बादल छाए,
बच्चों के मन सावन भाए।

हरियाली का रंग सुहाया,
सावन सबके मन को भाया। 
3 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

854 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile