विज्ञापन

तूफान आता रहा है

Hans Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तूफान
        
                                                    
                            
आता रहा है
तूफान जाता
रहा है
इंसान तूफान पर
मुस्काता रहा है ।
फेनिल लहरों में
फंसकर
फेनिल लहरों से
लड़कर
इंसान इतराता रहा
है
तूफान आता रहा
है ।
बाहों में हम को
झुलाता रहा है
बदला है
स्थला कृतियां
सभ्यता के
टुकड़ों को
हरदम उड़ाता
रहा है
रेत का अंधड़ चलाता रहा है
तूफान आता रहा
है
तूफान जाता रहा
है
खतरनाक है
हमारी गतिविधियां
विकास का पैमाना
उलझाता रहा
है
दबाव जनसंख्या का
जंगल उड़ाता
रहा है
लहरों पर
शासन किया है
हमने
प्रकृति को जहर
दिया है हमने
तूफान को
पैदा किया है
हमने
कार्बन उत्सर्जन
में हाथ बटाया है
हमनें
अपेक्षित तापमान
से ऊपर
इंसान गिड़गिड़ाता

रहा है
तूफान आता रहा
है
तूफान जाता रहा है
 
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13066 कविताएं

View Profile