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आस्था अस्पताल में

G.S BHARTENDU

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज मै जिंदा हूं, हूं मगर किस हाल में
        
                                                    
                            
दिल तो वहीं मर गया था अस्पताल में
आ बैठा था तीसरा ठीक बगल में उसके
कितना कुछ बदल गया सिर्फ ढाई साल में

फिर जो उसने दिल से चाहा
यार ! उसका क्या होता है?

आंखों में नींद नहीं होती और काला रैन होता है
दिल उस रोज के बाद हर रोज बेचैन होता है

ये वो पल नहीं था जो रोज सपने में देखा था
उसके ठीक बगल में कोई और शख्स बैठा था

मेरा हाल था उस वक्त जैसे दिन से सूरज रूठ गया हो
मानो जल का मै वाशिंदा हूं, और समंदर सुख गया हो

अगर जो चाहा न मिला तो मिट्टी सोना क्या होता है
मुझसे क्या तू पूछता है मोहब्बत खोना क्या होता है

इजहार वक्त पर न हुआ तो हाथ मलाना क्या होता है
जाकर पूछो जानवरों से जंगल जलना क्या होता है

क्या होता है जब एक इंसान हंसना रोना छोड़ देता है
रिश्ता पूरी दुनिया का और बंधन सारा तोड़ देता है

तोड़ देता है सपनों को, उम्मीदे सबसे छोड़ देता है
फिर रहता है दुनिया में पर खुद से जुदा हो जाता है
मतलब सबसे छोड़ देता है स्वयं खुदा हो जाता है

आज तो मैं जिंदा हूं, हूं मगर किस हाल में
दिल तो वहीं मर गया था, उसी अस्पताल में
4 दिन पहले
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