मुहब्बत की कहानी भूल जाना,
सभी बातें पुरानी भूल जाना।
अभी सच बोलने के दिन नहीं हैं,
अभी तुम हक़ बयानी भूल जाना।
यक़ीनन भूलना मुश्किल बहुत है,
मगर यादें सुहानी भूल जाना।
बिछड़ कर मुत्मइन होने से पहले,
मेरी आंखों का पानी भूल जाना।
नहीं है बाग़ में वो पेड़ अब तो,
उकेरी हर निशानी भूल जाना।
कहाॅं है मुस्तक़िल दुनियां में कुछ भी,
वो रुत भी थी ज़मानी भूल जाना।
न बावस्ता था दिल से ग़ैर वो तो,
था हर वादा दहानी भूल जाना।
-अनुराग मिश्र ग़ैर