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अक्सर ये सोच कर

Fanindra Dev

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अक्सर ये सोच कर हम घबराए हुए हैं
        
                                                    
                            
किस क़दर हम इश्क़ में ठुकराए हुए हैं
पूरा जमाना उसका अपना हो गया
इकलौते हम ही उसके पराए हुए हैं
मानो जिस्मों से दूर ये अब साये हुए हैं
उसकी हर खता को कर दिया नज़रंदाज़ हमने
उसकी यादों को हम सीने से लगाये हुए हैं
एक महीने पहले
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