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तू जो रूठे तो रब रूठे

Dr. Rashmi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तू जो रूठे तो रब रूठे
        
                                                    
                            
हँसे तो चाँद निकल आये

मेरी दुनिया तेरी महफिल
मिले जिस दम करार आये

पता पूछे मेरा हमदम
नज़ाकत पे जलाल आये

हिना में नाम छुपा ले वो
मुझे अब क्यूँ मलाल आये

ख़ुदाया नाम जब लूँ मैं
मेरे रुख़ पे जमाल आये

ये क्या रंग लाया इश्क़ मेरा
ये फूलों से सवाल आये

हर आलम तू नज़र आये
पयाम आये, सलाम आये

- © डॉ. रश्मि झा

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