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सिलसिले कुछ प्यार में ऐसे रहे

Dr. Rashmi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सिलसिले कुछ प्यार में ऐसे रहे
        
                                                    
                            
गुल, बहार, चाँद राहों में रहे

शोख़ नज़रें जागती थीं रात भर
कहकशाँ दामन में सिमटे ही रहे

धड़कनों में गीत मीठे से नये
चाहतों के साज़ पे बजते रहे

हसरतों ने छू लिया था आस्माँ
ख़्वाब कितने कदमों से लिपटे रहे

रात की बरसात दिल का हाल बन
ख़त में रिमझिम सा बरसते ही रहे

+ डॉ. रश्मि झा


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4 वर्ष पहले
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