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ख़ुदा की राह में बंदे तेरा मुक़ाम रहे

Dr. Rashmi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उड़े तो ठीक मगर वापसी का ध्यान रहे
        
                                                    
                            
जमीं पुकारता, उसका भी तो कुछ मान रहे

जिया तू हाशिये पे, जद्दोजहद भी खूब रही
दूर जमाने से, तेरा अपना भी जहान रहे

था जिद के दिखायेंगे, हम ही हम हैं जहाँ में
अच्छा है घर के बाहर बंदे तेरी दूकान रहे

तौला किया है खुद को दुनिया की नज़र से
अपनी अज़ीम हस्ती का कुछ तो गुमान रहे

हँसे के फूल हो मगन, जियें फ़कीर सा
ख़ुदा की राह में बंदे तेरा मुक़ाम रहे

© डॉ. रश्मि झा

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4 वर्ष पहले
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