विज्ञापन

चाँद मेरा हो गया

Dr. Rashmi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं जो तेरा हो गया
        
                                                    
                            
जन्नत बसेरा हो गया

रात तारों सी सजी
रौशन सवेरा हो गया

जुस्तजू जिसकी थी दिल में
वो चाँद मेरा हो गया

तुम से मिलके जाने-जाँ
गुलशन में डेरा हो गया

दुनियावालों कुछ न पूछो
कब मैं जागा, सो गया

महफिलों में चर्चे मेरे
कैसा ये रुतबा हो गया

मस्ती छाई चाल में
जाने क्या मेरा हो गया

दर-दर फिरूँ, सजदा करूँ
ये दिल फकीरा हो गया

- डॉ. रश्मि झा
rashmijha1909@gmail.com

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all