किन हालातों में
यह पौधा लगा,
यह तो नहीं पता।
लेकिन यह निश्चित है-
पौधे से वृक्ष कैसे बना।
परिस्थितियों के आँसू
और मेहनत के पसीने की बूंदों से
पला और बड़ा हुआ यह नन्हा पौधा,
और बना एक विशाल वृक्ष।
यह केवल बूंदें ही नहीं थीं,
बल्कि नदी की एक धार थी।
इसी से पला, बड़ा हुआ
यह बट वृक्ष,
जिसका
मजबूत है आधार,
विशाल है विस्तार।