अपनी कातिल निगाहों से से मुझे यूं ही ना देखा करो सनम,
शरारत करने का मन अब भी करता है तेरे साथ,
पता नहीं बचपन मेरे अंदर जिंदा या तेरा इश्क अधूरा है,