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दिल के फफोले

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल के फफोले..
        
                                                    
                            

जिस्त ए कश्ती बीच भंवर में डोले,
भड़कते रहते है अरमानों के शोले.

ऐसे लहज़े में बात मत किया कर,
कही फूट न जाए, दिल के फफोले.

सुनता नहीं कोई समझता ही नहीं,
बोले तो, किसी से अब क्या बोले.

क्यू दूसरे पर हम, तोहमत लगाए,
पहले खुद को, क्यों न हम टटोले.

नर्मी से एक दूजे को समझ जाए,
क्यों रिश्ते में खुद हम ज़हर घोले.

दिल में क्या है, बताना है अच्छा,
तुम गर बोलो तो हम जुबां खोले.

जीने में, आसानी होगी, ' मानसी,
क्यूंकर न उतार फेंके दर्द के चोले.

 
2 महीने पहले
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