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लोगों ने पहले यक़ीन नहीं किया

Divyansh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल तक जो ख़्वाब था,
        
                                                    
                            
आज किताब बन गया।
स्याही से निकला हर एहसास,
मेरी पहचान बन गया।

लोगों ने पहले यक़ीन नहीं किया,
फिर शब्दों ने सबको जवाब दिया।
जो अल्फ़ाज़ दिल में कैद थे,
उन्होंने ही मुझे लेखक बना दिया।

ये मंज़िल नहीं, बस शुरुआत है,
अभी कई सफ़र बाकी हैं।
पहली किताब ने उड़ना सिखाया है,
अब आसमान के पन्ने बाकी हैं।
2 महीने पहले
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