काम अपना मत करो
आलोचना दिनभर करो
देश कैसे अब चलेगा
सीख सबको बस देते रहो.
ज्ञानी बन गंगा बहाओ
कर्तव्य से जी चुराओ
माथे पर टीका लगाओ
सीख सबको बस देते रहो.
समय से कभी मत आओ
वक़्त का रोना सुनाओ
अब जमाना बुरा हो गया
सीख सबको बस देते रहो.
सुधरना चाहता कोई नहीं
रोते हैं ये दुनिया बदल गई
सीखना खुद ना चाहा
सीख सबको बस देते रहे
-दिनेश चौहान