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निगहबानी मुझे दे दो

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उंगलियां नर्म मेरे हाथों पर रखकर तो देखो
        
                                                    
                            
खिड़कियां दिल की हौले से ये खुल जायेंगी.

लट जो गालों पर पड़ी पा के पवन का झोंका
बन्द आँखों से छुअन दिल में वो उतर जायेगी.

कच्चे धागों से बँधा ये प्यार बहुत नाजुक है
घाट पक्का है बना दूर तक हर लहर जायेगी.

भार यौवन का ये सम्भाले जो नहीं सम्भला
सिर को कन्धे पे मेरे रख दो तो नींद आयेगी.

लोग करते हैं सफ़र जान ये हथेली पर लेकर
निगहबानी मुझे दे दो फ़िकर भी चली जायेगी.
-दिनेश चौहान
1 सप्ताह पहले
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