विज्ञापन

लहरों को अब ना दूर करना

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब कभी हाथों से अपने छोड़कर मत दूर करना
        
                                                    
                            
उंगलियों संग, कर इशारे मत मुझे मजबूर करना
पत्थरों के ढेर से चुनकर के खूबसूरत कंकड़ कोई
झील के शांत जल में लहरों को ना अब दूर करना.
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile