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जब भी प्यार में होते बच्चे

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ वादे झूठे और सच्चे
        
                                                    
                            
प्रेम में भीगे कुछ कुछ कच्चे
प्रथम मिलन का उत्सव बनते
जब भी प्यार में होते हम बच्चे.

मुँह चुप रहता आंखें कहतीं
अन्दर प्रेम की दरिया बहती
होठों ने कुछ कहने की सोची
जीभ फिसल कर दूजा कहती.

छोटी छोटी सारी बातों में
नेह भरी काली रातों में
चाह मिलन की जब भी होती
उलझन सी होती यादों में.

दिन बचपन के और यौवन के
स्वर्ण स्मरण होते जीवन के
हर एक घटना मील का पत्थर
सफ़र अधूरे हर जीवन के.
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
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