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धार वक़्त की देख के चलना

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टंगे हुये चमगादड़ से उल्टे लोगों को क्या कहना
        
                                                    
                            
हुई रोशनी अंधे हो गये , काली रातों संग उड़ना.

मौसम जैसे लोग भी बदले देख हवा का रुख बदला
कुछ भेड़ों के संग चलने से शेर ने छोड़ दिया लड़ना.

बिजली कड़की मेघा बरसे उफनायीं नदियाँ सारी
घाटों ने भी देख लिया है बाढ़ के पानी का बढ़ना.

दूर क्षितिज से सारी आंखें एकटक हमको देख रहीं
हालातों से जूझ जूझ कर मिलकर हमको है भिड़ना.

देश हमारा धरती अपनी कण कण की सौगंध हमें
धार वक़्त की देख के चलना शिखरों पर है चढ़ना.
-दिनेश चौहान
2 महीने पहले
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