विज्ञापन

तेरे घर के सामने

Dheeraj Porwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे घर के सामने
        
                                                    
                            
मेरा घर क्यू नहीं
देखे बिन तुझे मेरा
दिन बनता नहीं
पर सामने जब भी आओ तो
नजरे झुकी
दिल को कैसे समझाऊ मैं
आता नहीं
तुम समझो ना मेरी बातों को
मेरे वादो को इरादों को
तुम्हे प्यार कितना
हम करते हैं
पर सामने कुछ भी कहने से
डरते हैं

तेरे होठों पे मेरा नाम
कोई उलझन नहीं
देखु तुजको हर शाम
मेरे दिल की लगी
पर सामने जब न आओ तो
टूटे हर खुशी
फिर भी तुम मुझसे रूठे क्यू
मैं समझू नहीं
तुम समझो तो मेरी बातो को
मेरी आखों को और इरादों को
तुम्हे याद कितना
हम करते है
पर बोलने से कुछ भी, हम
डरते है

क्यू ये रूठी हुई सी
जिंदगी छूटी हुई सी
मौत भी ना आए तो मैं क्या करू
तेरे बिन जिया जाये ना
मैं क्या करू
तू ही बता
तू ही बता
मैं क्या करू
मैं क्या करू

मैंने क्या कहा
तुमने क्या सुना
क्यू डूबे हो इस तरह
मेरी यादों में ये बता
कैसे कह दे कि मेरा दिल तेरा हुआ
तेरा हुआ...... तेरा हुआ
मेरे दिल का चैन तेरा हुआ

मेरे घर के सामने
तेरा घर है नहीं
पर दिल मे मेरे रखती हूँ
तुझको मैं यू ही
जब सामने आजाता है तू
मेरे यूही
कुछ भी कहने से डरती हूँ तू
समझे नहीं
मैं समझू तेरी बातों को
तेरी आँखों को तेरे वादों को
तुझे प्यार कितना
हम करते है
पर सामने कुछ भी कहने से
डरते है

तेरे घर के सामने
मेरा घर क्यू नहीं
देखे बिन तुझे मेरा
दिन बनता नहीं
पर सामने जब भी आओ तो
नजरे झुकी
दिल को कैसे समझाऊ मैं
आता नहीं
तुम समझो ना मेरी बातों को
मेरे वादो को इरादों को
तुम्हे प्यार कितना
हम करते हैं
पर सामने कुछ भी कहने से
डरते हैं
3 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile