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नदी की उदासी

Devendra Pant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं देखता हूँ मुहाने तक आते-आते
        
                                                    
                            
नदी उदास हो जाती है l
उसकी उदासी फैल जाती है I
वह खुद को तोड़ लेती है l
सफर खत्म हुआ,
मंजिल आ गयी,
सागर से मिलना है,
खारा होना है I
सफर मगर मजेदार था I
-देवेन्द्र पंत
3 महीने पहले
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