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अगर तुम आते तो....

Devendra Pant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगर तुम आते तो....
        
                                                    
                            
अपनी भी एक पहचान होती,
दिल को साथी मिल जाता,
धड़कनों की भी ज़ुबान होती।

अगर तुम आते तो....
ये ढलती शाम कुछ और होती,
ये बे-मुरव्वत हर रात,
इतनी नाकाम न होती।

अगर तुम आते तो....
हवाओं में इन्द्र धनुष होता,
शमा भी जलती रहती,
परवाने पर भी फानूस होता I

अगर तुम आते तो....
हर गिले शिकवे धुल जाते
कुछ रास्ते बंद हो चले थे
वे फिर से खुल जाते l

मगर तुम आए नहीं,
और वक़्त गुज़रता गया,
तारों-सा ख़्वाब टूट टूट कर,
नजरों के सामने मरता गया।

होता ही होगा सब कुछ वहाँ
हुआ भी होगा सब कुछ वहाँ
अगर दिल की कह दूँ तो,
तुम्हारी शोखियाँ होंगी जहाँ
-देवेन्द्र पंत
3 महीने पहले
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