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"धरोहर है मां"

DEONANDAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरोहर है मां! जीवन की अमोल पूंजी है।
        
                                                    
                            
जन्म दी है कोख से, मां! बहुमूल्य कूंजी है।
रिश्ता जुड़ा है जन्म से, ममता की वह देवी है।

इस धरा की रूप दिखाई, जीवन की वह दर्पण है।
तूं केवल आधार नहीं है, नव किरण की रफ्तार है।
बड़ा किया सींचकर हमें, आश्रय में एक युग मिला।

तेरे पग पर नमन सौ बार, ये काया तेरी प्रस्तुति है।
ऋण मुक्त नहीं नमन से, दर्शन दो मां! यही स्तुति है।।

मेरे मन की पूजा, मेरे मन की धूप।
दर्शन को हर पल, खोज रही काया रूप।।

बिन बादल बरस रहा, बिन पवन मचल रही।
बिन छाया खोज रहा, बिन पर्वत अचल रही।।

कलुषित जीवन में मैं, बिन नाविक तैर रहा।
अनुपम सुख की छाया, तुझसे न कोई बैर रहा।।
धरोहर है मां! जीवन की शक्ति है, अमोल पूंजी है।।
-देवनन्दन कुमार
2 महीने पहले
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