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"आत्मा का घर"

DEONANDAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यहाँ सुनसान प्रवेश है
        
                                                    
                            
निकास भी सुनसान ही
यह स्थायी नहीं तेज रफ्तार है।(१)

किस चीज की बनी है
कहाँ निवास है मालूम नहीं
कहाँ से आया कहाँ चला जाता है? (२)

किसी को नहीं मालूम
इसमें कितनी तेज रफ्तार है
नहीं पता कहाँ आत्मा का घर है?(३)

यह हमारे, आपके अंदर है
इनकी पहचान किसी को नहीं
मानो हवा है, हवा सी धार है।(४)

अनन्त गहराई में हमेशा
अनन्त परिसीमन में निवास है
ऊंचे आसमान से ऊंचा विचार है।(५)

सागर सी गहराई है इनमें
हृदय बिल्कुल अपरिमित
सच में यह जीवन का आधार है।(६)

यह अंश है परमात्मा का
सूक्ष्म अंश किंतु विशाल है
विस्तृत नभ, विस्तृत भूभाग एकाकार है।(७)

कितने युग बदल गए समय से
कितने परिवर्तन की बयार बही
जीवन नियति में यह चक्राकार है।(८)

ऋषि मुनि तपोवन में तप कर भी
याचक, साधक, योग ऋषि भी मौन
मर्म न जान सका कोई कौन विकार है।(९)

भेद नहीं जान सका कोई
भाग नहीं सकता कोई इनसे
"आत्मा का घर" बहुत बेशुमार है।(१०)
- देवनन्दन कुमार
3 महीने पहले
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