विज्ञापन

हिंदी भारत की पहचान

डा बृजेश

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ की ममता, मन की भाषा,
        
                                                    
                            
हिंदी मेरी शान है।
इसकी मीठी धुन में बसता,
मेरा हिंदुस्तान है।।
माटी की खुशबू है इसमें,
गंगा-यमुना धार।
तुलसी, कबीर, रहीम की वाणी,
इसका अनुपम श्रृंगार।।
हिंदी केवल शब्द नहीं है,
यह भावों का संसार।
इसके अक्षर-अक्षर में है,
संस्कृति का विस्तार।।
गाँव-गली से नगर-नगर तक,
इसकी गूँजे तान।
जन-जन के हृदयों में बसती,
हिंदी की पहचान।।
विज्ञान, तकनीक और शिक्षा में,
हिंदी आगे आए।
विश्व-पटल पर अपनी भाषा,
नव-परचम लहराए।।
निज भाषा का मान बढ़ाएँ,
निज भाषा का ज्ञान।
हिंदी के सम्मान से बढ़ता,
भारत का सम्मान।।
आओ मिलकर प्रण यह लें,
हिंदी का गौरव बढ़ाएँ।
घर-घर हिंदी, मन-मन हिंदी,
जन-जन तक पहुँचाएँ।।
बोले आज ‘महादेव’ मिलकर,
हिंदी है सम्मान।
हिंदी से जग में गूँजे,
भारत का जयगान।।
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all