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मैं भी थोडी बेफिक्र हो गई हूं

Chhaya Bele

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो इतनी जुडी हुई थी
        
                                                    
                            
जैसे पेड़ की जड़ हों..

मां तुने खाना खाया?
तुझे नींद आयी?
तू उदास तो नहीं?
तुझे कोई दुःख तो नहीं?

मां...
मां...
मां......

कभी कभी मुझे लगता
ये कैसे जिएगी मेरे बाद

फिर उसे भी एहसास हुआ
अब थोड़ा हिसाब-किताब
में अंतराल लेती है

मैं भी थोडी बेफिक्र हो गई हूं

जीवन के लिए जरूरी होता है
गर्भनाल से मुक्त होना !!

 
एक महीने पहले
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