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अपना होने का दावा

Chandraprabha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपना होने का दावा, दुनिया में जो लोग किया करते हैं।
        
                                                    
                            
दर्द का खंजर सीने में, वो ही उतार दिया करते हैं।।
कसमे खाते हैं जो, राज-ए-मुहोब्बत रखने की मगर।
रुसवा महफिल में वो, सरे आम किया करते हैं।।
दामन थामते हैं जो, ज़िन्दगी भर के गम बांटने के लिए।
करके दागदार दामन, तकदीर आंखों से निभा करते हैं।।
खफ़ा न होना ऐ दोस्त, हम साथ तेरा जो दे ना सके।
ऐतबार तो हम खुद पर भी, नहीं किया करते हैं।।
दूर ही रखना हमसे, अपनी मुहब्बत के सिलसिले।
क्योंकि हम आजकल के, मुहब्बत करने वालों से डरा करते हैं।।
2 महीने पहले
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