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मेघ मल्हार के गीत

Chandra Makanday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिमझिम बरसते बादल साजन की याद दिलाते हैं,
        
                                                    
                            
हरा-भरा है आंगन सारा मगर सपने कुम्हलाते हैं।
तन मन भिगोती बारिश की बूंदें मन को तड़पाती हैं,
तन बदन में इन बूंदों से आग सी भड़कती जाती है।।

एक तरफ राष्ट्र सुरक्षा एक तरफ प्रेम मिलन की आशा है,
कैसे कहूं अपने सजना से तेरे बिन मन बहुत प्यासा है।
एक तरफ तू दुश्मन से लड़ता उधर रातों को मैं जागा करती हूं,
तेरे प्रेम में मेरे सजना इन बूंदों से ही मैं बातें अक्सर करती हूं।।

भारत माता की रक्षा की खातिर मुझे दुःख न कभी डराता है,
त्याग तपस्या और प्रेम का यह बंधन और दृढ़ हो जाता है।
धरती की हरियाली देख देख फिर मैं खुद को ही समझाती हूं,
मेरे साजन का शौर्य बढ़े नमन राष्ट्र को फिर करती जाती हूं।।

मेरा सावन तो तू है सजना तेरे ही मल्हार में गाती हूं,
इन बरसते बादलों से ही खैर खबर अक्सर मैं पाती हूं,
रिमझिम बरसती बूंदों को फिर मैं गीत विरह के सुनाती हूं।।

मैं भारत की नारी न ध्यान कभी किसी पर मैं लुटाती हूं,
भारत माता के चरणों में तेरा फोटो रख गीत खुशी के गाती हूं,
इसीलिए मैं भारत की नारी सबसे पवित्र मैं कहलाती हूं।।

 
3 महीने पहले
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