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जनसंख्या जागरुकता

Chandra Makanday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            विषय जन संख्या जागरुकता
        
                                                    
                            
बढ़ती जनसंख्या वन जंगल सब खाती जाती,
खाने पीने और हर आराम की चीज महंगी होती जाती।
फिर देते दोष सरकार को रोजगार नहीं मिलता है,
बढ़ती जनसंख्या का भार अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।।
------------------------------------------१
चारों तरफ कोहराम मचा मम्मी-पापा देखा करते,
खाने पीने की चीजों पर भी बच्चे झगड़ा करते।
कापी किताबों का बोझ भी मां-बाप से झिल नहीं पाता,
ज्यादा बच्चों को ज्यादातर सुख कभी मिल नहीं पाता।।
------------------------------------------२
छोटी सी जगह में ज्यादा बच्चे खप नहीं पाते हैं,
माता पिता के सीने पर जैसे अक्सर मूंग दलते जाते हैं।
कम बच्चे छोटा परिवार ही अक्सर सुख से रह पाता है,
ज्यादा बच्चों में तो घर का पूरा बजट ही बिगड़ जाता है।।
-------------------------------------------३
शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार कुछ भी नहीं मिल पाता है,
बढ़ती जनसंख्या से अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ जाता है।
जनसंख्या नियंत्रण कानून बने और ज्यादा बच्चे प्रतिबंधित हों,
तभी सभी के हित रोजगार प्रबंधन भली प्रकार सृजित हों।।
 
3 महीने पहले
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