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डूबी है क्या शराबों में तेरे पाँव की पायल

CHANDRA KANT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिपटी है गुलाबों में तेरे पाँव की पायल
        
                                                    
                            
दिखती है ख्वाबों में तेरे पाँव की पायल
इस पायल को सोहनी ने पहना था जवानी में
धुलती थी चेनाबों में तेरे पाँव की पायल
तेरे झूमके तेरे कजरे पर मिट जायेंगे कुछ दिल
ले लेती है बेहिसाबों में तेरे पाँव की पायल
हम तुम न रहेंगे मगर ये पायल रहेगी
होगी अमर किताबों में तेरे पाँव की पायल
चूमने को जब कभी होंठो से तुमने इसे लगाया
छुप गयी तभी नकाबों में तेरे पाँव की पायल
रब भी देख ले इनको तो शराबी हो जाये
डूबी है क्या शराबों में तेरे पाँव की पायल
एक महीने पहले
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