याद है तुमको वो मंजर जब आईने मे बस तुम और हम थे
तुमने पूछा कौन है बेहतर मैंने कहा तुझसे तेरी परछाई ज्यादा
लड़कपन तेरा एक बला था यौवन तेरा था भले कयामत
पर उम्र के इस ठहरेपन मे तू मुझको सबसे है भाई ज्यादा
जिस पल देखा तुझको मैंने उस पल तुझमे डूब गया था
यूँ तो हूं मैं तैराक सयाना पर थी तेरी आँखों की गहराई ज्यादा
सिर्फ जाति जुदा नहीं थी हम दोनों के धर्म भी अलग अलग थे
तुझे पाने को कई रूढ़िया तोड़ी जो जग ने ओढ़ी कम और बिछाई ज्यादा
तेरी यादें तेरा तस्सवुर तेरा इश्क़ तेरी फिक्र तेरा जिक्र
तन्हाई को महफ़िल सा सजा दे महफ़िल मे लाये तन्हाई ज्यादा
तू ही नहीं तेरी यादें भी कब से याद नहीं ये याद नहीं
केवल तू ही नहीं हरजाई है है तेरी यादें भी हरजाई ज्यादा
झूठ फ़रेब पाखण्ड स्वार्थ से भरी इस दुनिया में
मुस्कान तेरी निश्छलता से भरी है बसी दिल में तेरे सच्चाई ज्यादा
मेरी ग़ज़लें मेरे गीत मेरी नज़्म मेरे अशआर का मैयार इतना समझ लो
मीर ग़ालिब से बस तनिक ही कम है है इससे तनिक खुसरो की रुबाई ज्यादा