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सुलझा लूँ बस कुछ उलझे धागे

Brajesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रुक सको तो रुक जाना कुछ पल
        
                                                    
                            
फिर बेशक़ बढ़ जाना आगे
बस गुज़र जाने दो ये चंद घड़ियां
फिर बेशक़ मुझको जग त्यागे
ना मेरे पास मेरी ख़ुशियां
ना मेरे साथ मेरी दुनियां
ठहर जाओ कुछ देर को बस
शायद मिल जाए राह मुझे आगे
ना कोई शिक़ायत फिर तुमसे
ना कोई गिला फिर इस जग से
चले जाना तुम अपने रस्ते
सुलझा लूँ बस कुछ उलझे धागे
रुक सको तो...।
एक महीने पहले
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