आ सको कभी तो आ जाओ
कभी ख़्वाबों कभी ख़यालों में
मिल सको तो आ कर मिल जाओ
कभी जवाबों कभी सवालों में
हर जगह राह तेरी देखूँ
हर घड़ी चाह तेरी रखूँ
दिख सको तो हर पल दिख जाओ
मेरे घर की दर-ओ-दीवारों में
बस जाओ यहीं हवाओं में
रच जाओ मेरी दुआओं में
ढूंढूं तुमको मैं कहां कहां
हूं घिरा कई भूचालों में
आ सको कभी तो...।