विज्ञापन

ए आई अश्व की सवारी

BIJAY TIWARI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सोचा एक तस्वीर हो न्यारी,
        
                                                    
                            
करता हुआ मैं घुड़सवारी।
"कृत्रिम बुद्धि" आई तब याद,
सुना डाली मैंने भी फरियाद।

पत्नी जैसी नहीं लड़ाका,
बोलते बोला,'बोल मेरे आका'।
आज्ञाकारी, ऊपर से अक्लमंद,
दुनिया की सबसे भरोसेमंद।

रिश्तेदारी तेजी से बदली,
सबकी जगह एआई ने ले ली।
जो काम पहले करते थे जीन,
करती आज 'कृत्रिम बुद्धि' मशीन।

ज्योतिष शास्त्र को दे रही टक्कर,
खोजा इसने 'डूम कैलकुलेटर'।
उम्र-मृत्यु का दे पूर्वानुमान,
मचा रही यह वैश्विक घमासान।

कलन, विश्लेषण, डेटा सहेजकर,
संज्ञानात्मक-नकल निर्देश भेजकर।
कर रही परिवर्तित पद्धति-व्यवहार,
सस्ता और सहजता का दे उपहार।

इंसानी रिश्तों में बनी चुनौती,
न संदर्भ, न संवाद, न सहानुभूति।
संबंधपरक नैतिकता का अभाव,
गतिहीनता रोके पारस्परिक जुड़ाव।

करते रहिए एआई अश्व की सवारी,
ध्यान रखिए कि यह न पड़े भारी।
अमूर्त नहीं, संबंधपरक नैतिकता,
दुनियावी संबंधों की यही वास्तविकता।

गुण-दोष इसके हैं भाँति-भाँति,
सुरक्षा-जोखिम, अपारदर्शी, पक्षपाती।
निगलती मौलिकता, कृत्रिमता-कूप,
सुरसा, भस्मासुर का यांत्रिक रूप।

'कृत्रिम बुद्धि' एक अनहोनी क्रांति,
विकास-विनाश के मध्य फैली भ्रांति।
निगले नौकरियाँ, बढ़ाए बेरोजगारी,
विलक्षणता नहीं, यह मानसिक खुमारी।
-विजय बहादुर तिवारी
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7450 कविताएं

View Profile