विज्ञापन

ऐ परिंदे ! उड़ना सीख लिया

Bhuneshwar Anant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ आसमान के परिंदे, हमने उड़ना सीख लिया है,
        
                                                    
                            
इन हसीन वादियों में हमने जीना सीख लिया है।

खुद से बातें करके, खुद में खोना सीख लिया है,
ज़माने के संग, ज़माने के रंग में रंगना सीख लिया है।

रोना-धोना छोड़कर हमने हँसना सीख लिया है,
कहने वाले कहते रहे, हमने अनसुना करना सीख लिया है।

तेरे बिना जुदाई का ग़म हमने पीना सीख लिया है,
चेहरे के पीछे छिपे चेहरों को पहचानना सीख लिया है।

मुहब्बत में भी शान से रहना सीख लिया है,
राहत के आगे नहीं, रब के आगे शीश झुकाना सीख लिया है।

दोस्तों की महफ़िल में गप लड़ाना छोड़ दिया है,
अब तो अपनी कलम से एक नई दुनिया बसाना सीख लिया है।

कभी जो डरते थे आसमान की ऊँचाइयों से,
आज उन्हीं ऊँचाइयों को छूना सीख लिया है।

ऐ परिंदे, अब पिंजरे में रहना नहीं,
हमने खुले आसमान में उड़ना सीख लिया है।
-भुनेश्वर अनंत
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Şhahnawaz Pahat

39 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

854 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile