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मृगतृष्णा-सा ढूँढता, बाहर ही क्यों है

Bhavana Newaskar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर तरफ़ ये गहमागहमी क्यों है
        
                                                    
                            
चेहरों पर मुखौटे और दिल में उदासी
सब तरफ़ दिखावे का मंजर क्यों हैं
सबकुछ जिसके पास है वह भी
और जिसके पास कुछ नहीं है वह भी
सुकून की तलाश में भागता क्यों हैं
जबकि वह संतुष्टि, तृप्ति, वह असीम आनंद
अपने ही अंदर मिलेगा उसे, फिर भी
मृगतृष्णा-सा ढूँढता, बाहर ही क्यों है
2 महीने पहले
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