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अब हिंसा मंजूर रहेगी...

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                            बहुत चली अहिंसा से,
        
                                                    
                            
अब हिंसा मंजूर रहेगी।
अपनी लाज बचाने को
अब शस्त्र विद्या मंजूर रहेगी।।

बहुत हुई सियासत नारी पर,
अब नहीं चलेगी रीत पुरानी।
अपनी लाज बचाने को,
अब कूद पड़ी रण में चण्डी।।

क्यों भूल गये तुम इतिहास हमारा
इस देश में जन्मी लक्ष्मी (लक्ष्मीबाई) है।
क्यों भूल गये तुम उस नारी को,
जिसने पग-पग तुम्हें सम्भाला है।।

नारी कभी न थी अबला,
तुने उसे झुकाया है।
कमजोरी का पाठ पढ़ाकर
तुने उसे सताया है।।

बहुत हुआ अपमान हमारा
अब यह जिल्लत न मंजूर रहेगी।
बहुत चली अहिंसा से
अब हिंसा मंजूर रहेगी।।
— पूजा वैश्य
एक महीने पहले
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