विज्ञापन

अब हिंसा मंजूर रहेगी...

Be Creative

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत चली अहिंसा से,
        
                                                    
                            
अब हिंसा मंजूर रहेगी।
अपनी लाज बचाने को
अब शस्त्र विद्या मंजूर रहेगी।।

बहुत हुई सियासत नारी पर,
अब नहीं चलेगी रीत पुरानी।
अपनी लाज बचाने को,
अब कूद पड़ी रण में चण्डी।।

क्यों भूल गये तुम इतिहास हमारा
इस देश में जन्मी लक्ष्मी (लक्ष्मीबाई) है।
क्यों भूल गये तुम उस नारी को,
जिसने पग-पग तुम्हें सम्भाला है।।

नारी कभी न थी अबला,
तुने उसे झुकाया है।
कमजोरी का पाठ पढ़ाकर
तुने उसे सताया है।।

बहुत हुआ अपमान हमारा
अब यह जिल्लत न मंजूर रहेगी।
बहुत चली अहिंसा से
अब हिंसा मंजूर रहेगी।।
— पूजा वैश्य
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile