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दरवाज़ा लगाना भूल गए

Bajrang Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सामान तो सारा बांध लिया,
        
                                                    
                            
पर यादें ले जाना भूल गए।
जल्दी में थे तुम जाने की,
दरवाज़ा लगाना भूल गए।
अलमारी के एक कोने में,
कुछ सूखे फूल अभी बाकी हैं।
जिस राह से तुम हो कर गुज़रे,
उस राह की धूल अभी बाकी है।
सब समेट लिया तुमने लेकिन,
कदमों के निशां मिटाना भूल गए...
जल्दी में थे तुम जाने की,
दरवाज़ा लगाना भूल गए।
वो खिड़की जो अक्सर खुलती थी,
आज भी हवा से बजती है।
तुम्हारे बिना इस कमरे में,
अब सिर्फ उदासी सजती है।
तस्वीरें तो सारी हटा दीं,
पर अपना साया ले जाना भूल गए...
जल्दी में थे तुम जाने की,
दरवाज़ा लगाना भूल गए।
- बजरंग बीकानेरी
1 सप्ताह पहले
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