विज्ञापन

वो मेरी आँखों में...

Azhar Sabri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो मेरी आँखों में हर ख़्वाब सजा लेता है।
        
                                                    
                            
जब भी रोता हूँ तो सीने से लगा लेता है।

उस की आदत ही नहीं मुझ को अकेला रखना,
भीड़ में भी मुझे अपना-सा बना लेता है।

लोग आते हैं यहाँ दिल को दुखाने के लिए,
वो मगर दर्द को भी अपना बना लेता है।

मेरी बे-नाम सी तन्हाई का मरहम है वही,
जो मिरी चीख़ को सरगोशी बना लेता है।

ग़म की लहरें जो डुबोने को मचलती हैं मुझे,
अपने सीने में समंदर को समा लेता है।

जब भी बिखरे हुए टुकड़ों में मिला हूँ मैं उसे,
वो मुझे जोड़ के आईना बना लेता है।

दिल की गहराइयों में उतरा है वो एक फ़क़त,
जो समंदर को भी आँखों में छुपा लेता है।

तीरगी रात भी जब घेरने लगती है मुझे,
शम्अ-ए-उम्मीद वो पहलू में जला लेता है।

- अज़हर साबरी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all