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ऋतु है कितनी खुशनुमा

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऋतु है कितनी खुशनुमा, बारिश है घनघोर।
        
                                                    
                            
टप-टप बूँदें झर रहीं, और मचातीं शोर।।
और मचातीं शोर, भीगते छप्पर-छानी।
कुँआ, नदी, तालाब, खेत में फसलें धानी।।
खड़े हुए ये वृक्ष, लगे हैं जैसे हों पितु।
लगती है अनमोल, मुझे ये वर्षा की ऋतु।।
-अविनाश ब्यौहार
 
3 महीने पहले
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