विज्ञापन

हिंदी ग़ज़ल

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दफ्तर सारे बूचड़खाने।
        
                                                    
                            
हर कोई ऐसा ही माने।।

अम्मा आंगन में चिड़ियों को,
चुगा रही अनाज के दाने।

यदि कोई अपराध करे तो,
सजा-वजा के हैं पैमाने।

फिल्मों में मैंने ये देखा,
फूहड़- फूहड़- फूहड़ गाने।

दोस्त बना औ काट रहा था,
देरी से उसको पहचाने।

रुपयों का अवमूल्यन होता,
एक समय चलते थे आने।
-अविनाश ब्यौहार
 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13423 कविताएं

View Profile

Parul Bhaktani

1636 कविताएं

View Profile