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किताबों की मित्रता

Atul Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अहंकारी अंजुमन के आडंबरी आदमी,
        
                                                    
                            
इनको बिल्कुल न भाये सत्य-साहित्य,
है इनकी किताबों का आवरण आलीशान,
मगर खोखली कहानी, और बनावटी कृत्य,
इन परिष्कृत पाठकों में न मेरा स्थान।

फिर साधारण समाज का मिला साथ,
इनकी किताबें बे-रूह और बकवास,
काग़ज़ों पर केवल किब्र और कानाफूसी,
है इन्हें बस भरी किताबी तख्तों की अभिलाष,
इस समाज का दिया सहारा, थी मेरी मायूसी।

ना भाये लोग, उनकी किताबें, और भाषा,
फाड़े साधारण और दंभिक पन्ने,
उन झूठे वाक्यों और व्यक्तियों का फ़साना,
करीं सारी बंद सामाजिकता की पुस्तकें,
सिर्फ सच्ची किताबों से ही करूँगा दोस्ताना।

इंसानी चमड़ी न टिके जितनी किताबें,
इंसानी साथ भी न चले जितनी किताबें,
इंसानी ज्ञान मिटे, मगर न किताबें।
काग़ज़ों से ढंकूँगा अपना अकेलापन,
किताबों की मित्रता में है सयानापन।
2 महीने पहले
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