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मर जाने तक ज़िंदा रहना

Ashwet Mithun

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत मुश्किल है,
        
                                                    
                            
मर जाने तक ज़िंदा रहना

तेरे जाने के बाद भी साँसें चल रही हैं,
मगर मेरे भीतर ज़िंदगी दम तोड़ चुकी है।

चेहरे पर मुस्कान है, आँखों में वीरानी,
मैं जीता-जागता जिस्म हूँ, रूह है बेगानी।

तेरी यादें सीने में विरह की अग्नि बन जलती हैं,
और मेरी रातें तुझे याद करके पिघलती हैं।

तू नहीं है, फिर भी तुझसे बिछड़ नहीं पाता हूँ,
हर रोज़ ख़ुद को खोकर, हर रोज़ तुझे पाता हूँ।

कैसी सज़ा है इश्क़ की, कैसी ये लाचारी है,
तू ज़िंदगी से जा चुका, पर तुझसे ज़िंदगी हारी है।

अब किससे कहूँ कि मुझमें कुछ भी शेष नहीं है,
साँसें तो हैं, मगर जीने का कोई उद्देश्य नहीं है।

मौत आए तो शायद इस विरह से मुक्ति मिले,
पर तब तक जीना है—जब तक साँसों को चलना है।
 
2 सप्ताह पहले
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