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क्यों उठा रहा हूँ मैं इतना तन-मन पर बोझ

Arvind Kumar Garg

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अकस्मात् आई मेरे मन में यह सोच
        
                                                    
                            
क्यों उठा रहा हूँ मैं इतना तन-मन पर बोझ
हमें अज्ञानता, अनुभवों का दर्द, लगाव, उम्मीदें,
लोगों की राय ,सीमित विश्वास जैसे मानसिक बोझ
या फिर भूतकाल की असफलताएं, दुख और डर
जैसे भावनात्मक बोझ का नहीं होता एहसास
जो हम लेकर चलते हैं अपने साथ
मैंने अब किया है एहसास, पाया नया आत्मज्ञान

अनावश्यक बोझ छोड़ने के लिए करो ये काम
न ही करें आलोचना,दूसरों को न दें दोष, मन हो जब परेशान
कुछ भी नहीं है अपना, सब कुछ आया है कर्म-सूत्रों के अनुसार
लोगों और परिस्थितियों के बारे में लगाव या रोष का कर दे त्याग
अतीत या भविष्य के बारे में सोचने की बजाय, ध्यान-केंद्र में रखो वर्तमान
मैंने अब किया है एहसास, पाया नया आत्मज्ञान

जीवन में मन भी होना चाहिए हल्का, होना चाहिए सुकून
जीवन यात्रा को हल्का रखना ही है समझदारी
लेकर चलो केवल एक छोटा सा ही झोला,अगर हो जरूरी
रोज़ाना इस पुष्टि को दोहराएं कि मन मैं नहीं रखूँगा तनाव
नकारात्मकता की परतों को करो साफ
जितना कम होगा सामान, जीवन यात्रा उतनी ही होगी आसान
मैंने अब किया है एहसास, पाया नया आत्मज्ञान

बढ़ेगी खुशी, प्रेम और सहानुभूति, सक्रिय हो सकेगी मूल गुणवत्ता
अगर लोगों की अच्छाइयों पर केंद्रित करोगे ध्यान
त्याग दे दोष देना, चिंता करना आलोचना करना जैसे बेकार सामान
चिंता मत करो, चिंता है चिता के समान
अपितु चिंतन से ही निकलेगा समस्या का समाधान
जीवन बनाओ आसान, गीता में यही ज्ञान दे गए भगवान
मैंने अब किया है एहसास, पाया नया आत्मज्ञान
5 घंटे पहले
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