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पवन सुनावे उनकी गाथा

ARAVINDA MOHUN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पवन सुनावे उनकी गाथा, हाथों में ले जो झाल,
        
                                                    
                            
मंजीरे और मृदंग; तेरे झूठ के बहकावे में क्या रखा है।।
आवाज में दम न हो, वह मृदंग बजाने में क्या रखा है,
झूठ के झंडे फहराओ मत, झूठी शान में क्या रखा है।।
झंझावातों के पाले पड़, जिन्होंने जीवन ही अपना है
ढाला, उनके हौसले आजमाने में क्या रखा है।।
रणभूमि में छक्के छुड़ा दुश्मन के दांत न खट्टे कर पाए
तो पोपले मुंह से गाल बजाने में क्या रखा है ।।
5 घंटे पहले
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Lakshman Jha

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