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राम आएंगे

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन रमता जोगी बहता पानी,
        
                                                    
                            
इस दुनियां की रफ्तार वही,
सदियों तक तकती राह रही,
अब आस जगी है जोगन की,
राम आएंगे....
अब पानी भी मीठा होगा,
नयनों से खारा बहता था,
देखेंगी अंखियां भी मेरी,
अब तक सब धुंधला रहता था,
राम आएंगे....
बदलेगी दुनियां किस्मत भी,
घर होगा पक्का कुटिया नहीं,
ऐ फटी पुरानी धोती भी,
सिल जाएगी ऐसा लगता है,
राम आएंगे.....
अब थाने कोर्ट कचहरी में,
कीर्तन होंगे जयकारे भी,
अपराधी भय से कांपेंगे,
अब स्वर्ग सिधारेगा रावण,
अब आस जगी है जोगन की,
राम आएंगे....
5 घंटे पहले
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